जानिए किस बीमारी में पहनना चाहिए कौन सा रत्न?

आज कल सभी लोग अपने लक के लिए रत्न धारण करना चाहते हैं ताकि वे जीवन में अधिक से अधिक तरक्की कर सकें। जानकारों का कहना है कि रत्न धारण करने से सिर्फ कुंडली के दोष ही दूर नहीं होते, बल्कि इनकी मदद से कई बीमारियों में भी स्वास्थ्य लाभ मिल सकते हैं। Which gemstone should wear in the disease

लेकिन सबकी यही समस्या है कि आखिर कौन सा रत्न तरक्की देगा? रत्न धारण करने के लिए हमेशा कुंडली का सही निरिक्षण अति आवश्यक है। कुंडली के सही निरिक्षण के बिना रत्न धारण करना नुक्सानदायक हो सकता है। तो आइये आपको आज बताते हैं कि कौन सा रत्न आपके स्वास्थ्य पर कैसा असर डालता है।

ब्लू सैफायर (नीलम): 

यह रत्न डिप्रेशन में काफी फायदेमंद। इस रत्न की खास बात यह है कि इसकी तासीर बहुत ठंड होती है और यह जल्दी असर दिखाने वाला होता है। इसे धारण करने से कैंसर, एनीमिया, पीलिया, बुखार और एलर्जी में लाभ होता है। यदि इस रत्न को धारण करने के 24 घंटे के अंदर कोई असर दिखाई न दे तो तुरंत उसे उतारकर फेंक दें।

Which gemstone should wear in the disease
Which gemstone should wear in the disease

पर्ल  (मोती): 

मोती धारण करने से नेत्र रोग सम्बंधित बीमारियां, सांस लेने में तकलीफ व ब्लडप्रेशर जैसी समस्याओं में लाभ पहुंचाता है। कनिष्का उँगली में मोती पहनना शुभ फलदायी रहता है, क्योंकि कनिष्का उँगली के ठीक नीचे चन्द्र पर्वत है। इस कारण चन्द्र के अशुभ परिणाम व शुभत्व के लिए शुभ रहता है। उसे अनामिका में नहीं पहनना चाहिए। गुरु की उँगली तर्जनी में भी पहन सकते हैं।

मोती, चंद्रमा का रत्‍न है जो मानसिक रोगों से बचाता है। जिन लोगों को बहुत ज्‍यादा तनाव रहता हो उन्‍हें मोती रत्‍न धारण करना चाहिए। इसके अलावा निराशा, श्वास सम्बन्धी रोग, सर्दी-जुकाम के लिए मोती पहनना गुणकारी होता है।

कैट्स आई (लहसुनिया): 

लहसुनिया रत्न धारण करने से कफ, पाइल्स, अपच, आंखों की बीमारियां व सिरदर्द में लाभ मिलता है। लहसुनियां रत्न तर्जनी में पहनना चाहिए क्योंकि गुरु की राशि धनु में उच्च का होता है। यह ऊंचाइयां प्रदान करता है व शत्रुहन्ता होता है। इस रत्न को हीरे के साथ कभी भी नहीं पहनना चाहिए, क्योंकि इससे बार-बार दुर्घटना के योग बनता रहेगा।

डायमंड (हीरा): 

अगर किसी व्यक्ति की त्वचा की चमक कम हो रही है तो उसे हीरा धारण करने से लाभ मिल सकते हैं. हीरा धारण करने से ध्यान केंद्रित करने में मदद मिलती है। हीरा नींद में चलने की बीमारी को दूर करता है। इसके अलावा दिल संबंधी बिमारियों को भी दूर करता है। हीरा रत्न अत्यन्त महंगा व दिखने में सुन्दर होता है। इसे गुरु की उंगली तर्जनी में पहनते हैं, क्योंकि तर्जनी उंगली के ठीक नीचे शुक्र पर्वत होता है। शुक्र के अशुभ प्रभाव को नष्ट कर शुभ फल हेतु हीरा पहनते हैं।

शुक्र :

शुक्र का रत्‍न सफ़ेद पुखराज शरीर में रक्‍त की कमी की शिकायत को दूर करता है। मोतियाबिंद और नपुंसकता जैसे रोगों से बचने के लिए भी हीरा रत्‍न धारण करना चाहिए। इसके अलावा हीरा पहनने से एनीमिया, हिस्टीरिया तथा क्षय रोग से बचाव होता है।

येलो सैफायर (पुखराज):

ये बहुत कीमती रत्न है. ये धारण करने से मानसिक अशांति दूर हो सकती है. इससे एलर्जी, एनीमिया, एपेंडिक्स. आर्थराइटिस, पीठ का दर्द, ब्लैडर संबंधी समस्याओं, डायबिटीज, एकजिमा, टीबी और टायफाइड में राहत मिल सकती है. पुखराज से गुरु ग्रह से संबंधित दोष दूर होते हैं. इसे इंडेक्स फिंगर में पहनना चाहिए.

रूबी (माणिक):

माणिक अनामिका में पहना जाता है, यह सूर्य का रत्न है। बर्मा का माणिक अधिक महंगा होता है, वैसे आजकल कई नकली माणिक भी बर्मा का कहकर बेच देते हैं। बर्मा का माणिक अनार के दाने के समान होता है। माणिक आंखों की समस्याएं, बुखार, पीलिया, ब्लड संबंधी समस्याएं, ब्लड प्रेशर और दिल से सम्बंधित बिमारियों में फायदा पहुंचाता है।

एमरल्ड (पन्ना) :

ये रत्न गहरे रंग का होता है. गर्भवती महिलाओं के लिए पन्ना बहुत फायदेमंद है। इसे धारण करने से कान व आँख के रोग, पाचन संबंधी समस्याएं व बालों की गिरने की समस्याएं दूर होती हैं। पन्ना को हमेशा कनिष्का उंगली में ही धारण करना चाहिए।

मूंगा :

मूंगा, मंगल का रत्‍न्‍ है और यह रत्‍न ऊर्जा से भर देता है। किडनी के रोगियों को मूंगा रत्‍न धारण करने की सलाह दी जाती है। पीलिया रोग में मूंगा रत्‍न काफी फायदेमंद रहता है। बच्चों को मूंगा पहनाने से बालारिष्ठ रोग से बचाव होता है।

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