कभी दिल्ली की सड़कों पर खींचते थे तांगा, अब कई CEO से ज्यादा पाते हैं सैलरी

बड़ा और अमीर बनने की चाहत हर किसी की होती है. हर कोई पैसा कमाकर ऐशो- आराम की ज़िंदगी जीना चाहता है. पर सिर्फ सोचने से कुछ नहीं होता. इसके लिए कड़ी मेहनत और लगन की ज़रुरत होती है. कुछ ही लोगों में इस सपने को पूरा कर पाने की हिम्मत होती है.

आमतौर पर कहते हैं कि अच्छी पढ़ाई होने पर ही इंसान कुछ कर सकता है. लोगों का मानना है कि अच्छी शिक्षा मिलने पर ही अच्छी नौकरी मिलती है. पर यह बात सच नही है. कुछ लोग ऐसे भी पैदा हुए हैं जिन्होंने इस बात को ग़लत साबित कर दिखाया है. भारत और विदेशों में कई ऐसी बड़ी हस्तियां हैं जिन्होंने कम पढ़ाई होने के बावजूद पूरी दुनिया में अपने नाम का परचम लहराया है. आज हम जिस व्यक्तित्व की बात करने जा रहे हैं वह इनमें से ही एक हैं. कम पढ़े-लिखे होने के बावजूद इनका नाम देश के सबसे बड़े उद्योगपतिओं में शामिल है.

दिल्ली की सड़कों पर खींचते थे तांगा :

बता दें कि गुलाटी की फैमिली आजादी से पहले पाकिस्तान के सियालकोट में रहते थे। 27 मार्च 1923 को गुलाटी का जन्म सियालकोट में ही हुआ था। लेकिन, विभाजन के बाद वे भारत आ गए। गुलाटी ने चौथी कक्षा के बाद पढ़ाई छोड़ दी थी। बंटवारे के बाद इंडिया आने पर उनके पास महज 1500 रुपए थे। उन्होंने 650 रुपए में एक तांगा खरीदा था। फिर, न्यू दिल्ली स्टेशन से कुतुब रोड तक तांगा खींचा करते थे। इसके अलावा वे करोल बाग से बड़ा हिन्दू राव तक भी तांगा खींचते थे। काफी दिनों बाद उन्होंने लकड़ी का खोका खरीदकर फैमिली बिजनेस शुरू किया। उन्होंने दुकान का नाम महाशियां दी हट्टी देग्गी रखा।

कई दशकों तक लगातार मेहनत के बाद उनका बिजनेस MDH कंपनी के रूप में विदेशों में भी मशहूर है। 94 साल की उम्र में भी वे रोज ऑफिस का कामकाज देखते हैं। कई डीलर से बातचीत करते हैं। वे बिजनेस की पहली शर्त प्रोडक्ट की क्वालिटी और ईमानदारी मानते हैं। धर्मपाल इस वक्त 21 करोड़ सालाना के पैकेज पर काम कर रहे हैं। कंज्यूमर प्रोडेक्ट जैसी कंपनियों में गुलाटी की सैलेरी सबसे ज्यादा है। धर्मपाल गुलाटी 94 साल के हो चुके हैं। गुलाटी आज भी रोज दफ्तर और फैक्ट्री जाते हैं और खुद डीलरों से मुलाकात करते हैं। धरमपाल की कंपनी महाशियां दी हट्टी (जो MDH के नाम से मशहूर है) ने इस साल 213 करोड़ का मुनाफा कमाया। कंपनी की 80 फीसदी हिस्सेदारी गुलाटी के पास है।

छोटी सी दुकान से 1500 करोड़ का सम्राज्य

साल 1919 में धरमपाल के पिता ने पाकिस्तान के सियालकोट में एक दुकान खोली थी। बंटवारे के बाद धरमपाल का परिवार हिंदुस्तान आ गए। दिल्ली में पहुंचकर गुलाटी ने करोलबाग में छोटी सी कंपनी खोली। वहां से गुलाटी ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देगा। आज महाशियां दी हट्टी कंपनी 1500 करोड़ रुपये का सम्राज्य खड़ी कर चुकी है। जिसमे 15 फैक्ट्रियां, 1000 डीलर्स के अलावा। 20 स्कूल और एक अस्पताल भी शामिल है। एमडीएच के ऑफिस लंदन और दुबई में भी हैं। और कंपनी 100 से ज्यादा देशों में अपने प्रोडेक्ट्स सप्लाई करती है।

धर्मपाल गुलाटी जी की सैलरी 20 करोड़ है :

एमडीएच मसालों का नाम तो आपने सुना ही होगा. यह ब्रांड दुनिया के सबसे टॉप मसालों के ब्रांड में आता है. इसने मसालों की दुनिया में अपनी एक अलग ही पहचान बना ली है. इस ब्रांड को टॉप पर पहुंचाने के पीछे जिस व्यक्ति का हाथ है उनका नाम है धर्मपाल गुलाटी. धर्मपाल गुलाटी जी की उम्र 95 साल है और उनकी शिक्षा केवल पांचवी तक हुई है. इतनी कम शिक्षा होने के बावजूद वह करोड़ों कमा रहे हैं. आपको जान कर हैरानी होगी कि धर्मपाल गुलाटी जी की सैलरी 20 करोड़ है.

धर्मपाल गुलाटी एकमात्र ऐसे सीईओ हैं जिन्हें भारतीय खुदरा बाज़ार में सबसे अधिक सैलरी मिलती है. उनकी मेहनत और लगन ही है जिसकी वजह से वह आज इस मुकाम पर हैं. हम सालों से उनको एमडीएच मसालों के विज्ञापन में देखते आ रहे हैं. हम आपको बता दें कि पिछले साल ही उन्होंने 20 करोड़ की सैलरी ली है. इस ब्रांड ने अपने मसालों की कीमत कम रख कर बाकी कंपनीज़ को मात दे दी है. गुलाटी जी केवल मसालों के नहीं बल्कि दिल के भी बादशाह हैं, तभी वह अपनी कमाई का 90 प्रतिशत हिस्सा चैरिटी में दे देते हैं.

धर्मपाल गुलाटी जी के मसालों को पूरी दुनिया में निर्यात किया जाता है. उनके द्वारा बनाये गए मसालों का स्वाद पूरी दुनिया के ज़ुबां पर चढ़ा हुआ है. बेहतर शिक्षा ना मिलने के बावजूद उन्होंने एक अलग मुकाम पाया है और पूरी दुनिया में अपना और भारत का नाम रौशन किया है. इसलिए यह कहना बिल्कुल ग़लत है कि अच्छी शिक्षा मिलने पर ही इंसान बड़ा आदमी बन सकता है.

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